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विपश्यना भारत की एक अत्यंत पुरातन साधना विधि है। जिसका अर्थ जो जैसा है, उसे ठीक वैसा ही देखना-समझना है। लगभग २५०० वर्ष पूर्व भारत में यह पद्धति एक सार्वजनीन रोग के सार्वजनीन इलाज, अर्थात् जीवन जीने की कला, के रूप में सिखाया गया। जिन्हें विपश्यना साधना की जानकारी नहीं है, उनके लिए आचार्य गोयन्काजी द्वारा विपश्यना का परिचय एवं प्रश्न एवं उत्तर उपलब्ध है।

विपश्यना दस-दिवसीय आवासी शिविरों में सिखायी जाती है। शिविरार्थी दस दिनों में साधना की रूपरेखा समझते है एवं इस हद तक अभ्यास कर सकते है कि साधना के अच्छे परिणामों का अनुभव कर सकें। शिविर का कोई शुल्क नहीं लिया जाता, रहने एवं खाने का भी नहीं। शिविरों का पूरा खर्च उन साधकों के दान से चलता है जो शिविर से लाभान्वित होकर दान देकर बाद में आने वाले साधकों को लाभान्वित करना चाहते हैं।

शिविर एवं स्थान

शिविरों का संचालन कई विपश्यना केंद्रों पर तथा अस्थायी जगहों पर किया जाता है। हर जगह का अपना शिविर कार्यक्रम होता है। बहुंताश जगहों के शिविरों के लिए आवेदन शिविर कार्यक्रम में उचित दिनांक पर क्लिक करके किया जा सकता है। भारत एवं एशिया/पेसिफिक में अन्य जगहों में कईएक; उत्तर अमेरिका में दस; लेटिन अमेरिका में तीन; यूरोप में आठ; ऑस्ट्रेलिया एवं न्यूज़ीलेंड में सात; मध्यपूर्व में एक एवं आफ्रिका में एक केंद्र है।

दस दिवसीय शिविर कई बार केंद्रों के बाहर कई जगहों पर स्थानिक साधकों द्वारा आयोजित किये जाते हैं। इन विश्व भर के शिविरों की अल्फाबेटीकल सूचि तथा शिविर स्थलों का ग्राफिकल इंटरफेस विश्व एवं भारत तथा नेपाल के लिए भी उपलब्ध है।

विशेष शिविर एवं संसाधन

जेलों में भी विपश्यना सिखाई जाती है। उद्योगपति एवं जेष्ठ सरकारी अफसरों के लिए दस दिवसीय एक्जिक्यूटिव कोर्स का आयोजन कई केंद्रोंपर किया जाता है। उनकी जानकारी के लिए एक्जिक्यूटिव कोर्स वेबसाईट पर जा सकते है।

विपश्यना साधना की जानकारी नीचे बतायी अन्य भाषाओं* में भी उपलब्ध है।